हमें अपने घर की छत पर झंडा क्यों लगाना चाहिए आओ जानें :
ध्वजा रोपण से घर व व्यापार में सतत् लक्ष्मी का आगमन होता है। (भविष्य पुराण)
ध्वज दण्ड 4, 8, 10, 16 या 20 हाथ तक लम्बा होना चाहिए, इससे अधिक नहीं। एक हाथ यानि 18 इंच (डेढ़ फुट)।
ध्वज के ऊपर देवता को सूचित करने वाला चिह्न बनवाना चाहिए। यानि जिस देवता का जो वाहन हो, वही ध्वजा पर अंकित रहता है।
भगवान विष्णु की ध्वजा पीत (पीला रङ्ग) वर्ण की, जिस पर गरुड़ का चिह्न हो।
शिवजी की ध्वजा श्वेत वर्ण की, जिस पर वृष (नन्दी) का चिह्न हो।
ब्रह्माजी की ध्वजा पद्म वर्ण की, जिस पर पद्म (कमल) अंकित हो।
भगवती की ध्वजा तीन रङ्ग की हो, जिसमें सिंह का चिह्न हो।
चामुण्डा की ध्वजा नीले रङ्ग की हो, जिस पर मुण्डमाला का चिह्न हो।
गौरी की ध्वजा अतिशय रक्त वर्ण (लाल रङ्ग) की हो, जिस पर गोधा (गोह/छिपकली) का चिह्न हो।
गणपति की ध्वजा शुक्ल वर्ण की हो, जिस पर मूषक का चिह्न हो।
कार्तिकेय का ध्वज दण्ड त्रिलौह का होता है, जिसमें पताका चित्र वर्ण की, जिसमें मयूर का चिह्न होता है।
हनुमानजी की ध्वजा केसरिया या लाल रङ्ग की होती है, जिस पर गदा का चिह्न होता है।
सूर्यदेव की ध्वजा पॅंचरङ्गी हो, जिसमें किंकिणी लगी हो एवं पुष्पमालाओं से संयुक्त हो, जिस पर व्योम का चिह्न हो।
इन्द्र की ध्वजा अनेक वर्ण की हो, जिसमें हाथी का चिह्न हो।
बलराम (बलदेव) की पताका श्वेत वर्ण की हो, जिसमें फाल सहित हल का चिह्न हो।
सम्बन्धित देवताओं के मन्दिर शिखर के ऊपर विधि – विधान से ध्वजा स्थापित करने से सम्पत्ति की सदा वृद्धि होती रहती है। घर में लक्ष्मी का स्थिर निवास होता है तथा अनेक समस्याओं का समाधान होता है।






