मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि 07 जून 2026 रविवार को सूर्योदय से 08 जून प्रात: 03:24 तक रविवारी सप्तमी है।
सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं। इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान, दान व श्राद्ध अक्षय होता है (शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याया (10)
रविवार सप्तमी : रविवार सप्तमी के दिन जप/ध्यान करने का वैसा ही हजारों गुना फल होता है जैसा की सूर्य/चन्द्र ग्रहण में जप/ध्यान करने से होता |
रविवार सप्तमी के दिन अगर कोई नमक मिर्च बिना का भोजन करे और सूर्य भगवान की पूजा करे, तो उसकी घातक बीमारियाँ दूर हो सकती हैं, अगर बीमार व्यक्ति न कर सकता हो तो कोई और बीमार व्यक्ति के लिए यह व्रत करे, इस दिन सूर्यदेव का पूजन करना चाहिये.
सूर्य भगवान पूजन विधि :
1. सूर्य भगवान को तिल के तेल का दिया जला कर दिखाएँ , आरती करें
2. जल में थोड़े चावल, शक्कर, गुड, लाल फूल या लाल कुम कुम मिला कर सूर्य भगवान को अर्घ्य दें
सूर्य भगवान अर्घ्य मंत्र :
1. ॐ मित्राय नमः
2. ॐ रवये नमः
3. ॐ सूर्याय नमः
4. ॐ भानवे नमः
5. ॐ खगाय नमः
6. ॐ पूष्णे नमः
7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः
8. ॐ मरीचये नमः
9. ॐ आदित्याय नमः
10. ॐ सवित्रे नमः
11. ॐ अर्काय नमः
12. ॐ भास्कराय नमः
13. ॐ श्रीसवितृ – सूर्यनारायणाय नमः
ग्रहण का योग या दोष :
जब सूर्य या चन्द्रमा की युति राहू या केतु से हो जाती है तो इस से हो जाती है तो इस दोष का निर्माण होता है।
चन्द्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण दोष की अवस्था में जातक डर व घबराहट महसूस करता है।
चिडचिडापन उसके स्वभाव का हिस्सा बन जाता है। माँ के सुख में कमी आती है।
किसी भी कार्य को शुरू करने के बाद उसे सदा अधूरा छोड़ देना व नए काम के बारे में सोचना इस योग के लक्षण हैं।
जिन लोगो में दिमाग में हमेशा यह डर लगा रहता है, उदाहरण के लिए समझे कि “मैं पहाड़ो पर जैसे ऊटी या शिमला घूमने जाऊँगा तो बस पलट जाएगी।
इस प्रकार के सारे नकारात्मक विचार इसी दोष के कारण मन में आते है।
अमूमन किसी भी प्रकार के फोबिया अथवा किसी भी मानसिक बीमारी जैसे डिप्रेसन, वहम आदि इसी दोष के प्रभाव के कारण माने गए हैं।
यदि यहाँ चंद्रमा अधिक दूषित हो जाता है या कहें अन्य पाप प्रभाव में भी होता है, तो मिर्गी, चक्कर व पूर्णत: मानसिक संतुलन खोने का डर भी होता है।
सूर्य द्वारा बनने वाला ग्रहण योग पिता सुख में कमी करता है।
जातक का शारीरिक ढांचा कमजोर रह जाता है। आँखों व ह्रदय सम्बन्धी रोगों का कारक बनता है। सरकारी नौकरी या तो मिलती नहीं या उसको निभाना कठिन होता है।



