मुख्यमंत्री के बेटे का नाम…जिसकी चर्चा अब डिप्टी सीएम तक पहुंच चुकी है। जिस चेहरे के राजनीति में कदम रखने का इंतजार पूरे बिहार को था। जिसके आने से पहले ही कैमरे सज गए थे, कार्यकर्ता उत्साह से भरे हुए थे और नेता भी पूरी तरह चौकन्ने थे।
और जब वो सामने आया…तो पैरों में साधारण चप्पल थी।
बिहार की राजनीति में नेताओं की एंट्री अक्सर अलग ही अंदाज़ में होती है। महंगी गाड़ियों का काफिला, चारों तरफ सुरक्षा का घेरा और ऐसा रौब कि दूर से ही पता चल जाए कि कोई “खास” शख्स आ रहा है।
लेकिन Nishant Kumar ने यह रास्ता नहीं चुना।
पैरों में साधारण चप्पल, शरीर पर बेहद सादा पहनावा और चेहरे पर एक शांत-सी मुस्कान, जिसमें किसी तरह का बनावटीपन या दबाव नजर नहीं आता था।
कार्यकर्ताओं ने जब यह दृश्य देखा तो पहले हैरान हुए, फिर उनके चेहरे पर मुस्कान आई और कुछ ही पलों में तालियों की गूंज सुनाई देने लगी।
क्योंकि बिहार का आम आदमी तो चप्पल ही पहनता है। खेतों में मेहनत करने वाला किसान भी चप्पल पहनता है। सड़कों पर पार्टी का झंडा उठाकर चलने वाला कार्यकर्ता भी चप्पल ही पहनता है।
और जब नेता का बेटा भी उसी अंदाज़ में सामने आए तो वह लोगों को “अपना” लगने लगता है।
Nishant Kumar जब मंच पर पहुंचे तो सामने सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे।
वही कार्यकर्ता जो बरसों से धूप, बारिश और कड़ाके की गर्मी में पार्टी के लिए काम करते रहे हैं। जिन्होंने कभी किसी पद की मांग नहीं की, न किसी इनाम की उम्मीद रखी।
निशांत ने उन सभी को देखा और तुरंत दोनों हाथ जोड़कर अभिवादन किया।
राजनीति में ऐसा दृश्य बहुत कम देखने को मिलता है। आमतौर पर नेता हाथ हिलाकर अभिवादन करते हैं, लेकिन निशांत ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया।
जहां अक्सर नेता आशीर्वाद लेने की मुद्रा में रहते हैं, वहां उन्होंने कार्यकर्ताओं के सामने झुककर सम्मान दिया।
उस एक क्षण में उन्होंने कार्यकर्ताओं का दिल जीत लिया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान उनकी नजरें बार-बार Sanjay Jha की ओर जाती रहीं।
खड़ा होना हो तो उनका इशारा, बैठना हो तो उनका संकेत, बोलना हो तो उनकी अनुमति।
मुख्यमंत्री का बेटा होते हुए भी वह पूरी तरह एक अनुभवी नेता के मार्गदर्शन में चलते नजर आए—बिना किसी घमंड के।
असल में यही असली ताकत होती है। जो नेता शुरुआत से ही खुद को सर्वज्ञानी समझ लेता है, वह जल्दी पीछे छूट जाता है।
लेकिन जो यह मानता है कि उसे अभी बहुत कुछ सीखना है, वही राजनीति में लंबे समय तक टिकता है।
निशांत ने अपने पहले कदम के साथ सीखने का रास्ता चुना।
बिहार की राजनीति में Nitish Kumar की पहचान हमेशा उनकी सादगी से जुड़ी रही है। मुख्यमंत्री होते हुए भी उनका रहन-सहन और व्यवहार अक्सर एक सामान्य व्यक्ति जैसा ही दिखाई देता है।
आज उसी सादगी की झलक उनके बेटे में भी देखने को मिली।
पिता ने अपनी सादगी के दम पर बिहार की राजनीति में मजबूत पहचान बनाई…
और बेटे ने भी उसी सादगी के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा का पहला कदम रखा।






