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“दस साल बाद… दो दिल फिर एक-दूसरे के हो गए”

राजवीर जैसे ही शादी वाले घर में दाख़िल हुआ, उसके कदम ठिठक से गए। सामने मंडप के पास खड़ी, हल्की हरी रेशमी साड़ी में सजी वह स्त्री… वही थी—कीर्ति।
दस साल हो गए थे उसे देखा तक नहीं था…!!

उसके साथ आया उसका चौदह साल का बेटा रवि, अपनी माँ को देखते ही भागकर उसकी कमर से लिपट गया। कीर्ति का चेहरा एक पल को ढीला पड़ा उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि बेटा अब भी उसी प्यार से उससे मिलता है, जैसे तब मिलता था…!!

सबको अजीब लग रहा था……!!
क्योंकि राजवीर और कीर्ति तलाकशुदा नहीं थे, पर दस साल से अलग थे…!!

कीर्ति आज अपनी छोटी बहन सृष्टि की शादी में थी।
और राजवीर?:::::??
वह सिर्फ इसलिए आया था क्योंकि सृष्टि ने हमेशा उसे “जीजाजी” कहकर ही बुलाया था।
उसे पता था, कीर्ति सामने आएगी…
उसने मन ही मन फैसला कर रखा था कि वो बस उसे नजरअंदाज करेगा……!!

वही किया भी…..!!

कीर्ति के चेहरे पर एक पल को हल्की ठेस दिखी, पर वह चुप रही….!!

कुछ ही दूर गया था कि उसकी बारह वर्षीय बेटी आन्या सामने आ गई
“पापा…….:::::::::::::!

और बस, राजवीर का सारा कठोरपन पिघल गया।
बेटी को उसने कसकर गले लगा लिया।
वे एक ही शहर में रहते थे, मगर मिलते ऐसे थे जैसे दो अजनबी जो सिर्फ बच्चों की वजह से जुड़ते हों…!!

रिश्ता टूटा कैसे था?::::::??

राजवीर चाहता था कि कीर्ति हमेशा घर पर रहे…
उसकी माँ भी अक्सर कह देती……!!

“मेरे बेटे की कमाई पर ऐश करती है… काम-धाम कुछ नहीं करती….!!

कीर्ति पढ़ी-लिखी थी, महत्वाकांक्षी भी।
पति की बात मानने की कोशिश की, पर भीतर की आवाज़ ने उसे नौकरी की ओर धकेला….!!

उसने गुपचुप टीचिंग एग्ज़ाम दिया और पास हो गई…!!

जब राजवीर को पता चला, वह तमतमा उठा
“जॉइन करोगी तो रिश्ता खत्म…!!

कीर्ति ने पहली बार दृढ़ता दिखाई
“मैं अपनी पहचान बनाऊँगी…!!

नौकरी जॉइन की और उसी दिन घर छोड़ दिया…!!
बेटी साथ ले आई…
बेटा राजवीर के पास रह गया…!!

दस साल गुजर गए।
न कोई तलाक, न कोई बातचीत।
बस दो लोग… जो एक-दूसरे से दूर रहने की कोशिश में भी रोज़ एक-दूसरे को याद करते थे…!!

शादी में हल्दी की रस्म चल रही थी।
दूल्हे को जोड़े में तेल चढ़ाना था।
राजवीर अकेला खड़ा था।
तभी सृष्टि ने कहा….::::::::::…..

“जीजाजी, कीर्ति दीदी नहीं आ रही? ऐसे अकेले कैसे करेंगे आप?::::::??

ये सुनते ही पता नहीं कीर्ति को क्या हुआ…
वह तेज़ कदमों से आई और राजवीर के पास खड़ी हो गई……!!
दोनों ने मिलकर रस्म निभाई।
दस साल बाद पहली बार इतने करीब……!!

राजवीर को आज भी वही चंदन की हल्की खुशबू महसूस हुई, जो कभी उसके कपड़ों में बस जाती थी।
और कीर्ति ने देखा….!!

उसकी दी हुई काली धागे वाली कड़ी आज भी राजवीर की कलाई में थी….!!

दिल दोनों का कुछ पल को थम-सा गया…!!

उन्होंने कैमरे में मुस्कुराकर पोज़ दिया
पर उस मुस्कान में अधूरी कहानी तड़प रही थी…!!

रात को कीर्ति ने बेटी आन्या से पूछा
“देखो, तुम्हारे पापा कहाँ सोए हैं? वहाँ पंखा है या कूलर?:::??

आन्या ने बताया….:::::…..
“मम्मी, पापा कह रहे थे बहुत गर्मी है। वहाँ कूलर नहीं है…!!

कीर्ति खुद दूसरे कमरे में कूलर लगवाने लगी
ठंडा पानी डाला, चादर बदली…!!

बेटी को बोला
“उन्हें इधर भेज देना… पर मेरा नाम मत लेना…!!

जब राजवीर को पता चला कि कीर्ति ने ये किया, उसके दिल में कहीं गहराई में एक टीस उठी…
और उसी टीस ने किसी पुरानी नींद को जगा दिया…!!

“ये मुझे अब भी क्यों चाहती है…?::::??
मैंने ही उसे दूर धकेला था…!!

रात ढाई बजे….:::::::……””””……
कीर्ति की बेचैनी बढ़ी।
वह दबे पाँव उस कमरे तक पहुँची, जहाँ कभी दोनों साथ सोया करते थे……..!!

खुली खिड़की से उसे राजवीर दिखाई दिया
पसीने से भीगा, बेचैन, करवटें बदलता हुआ…!!

उसकी आँख भर आई।
काश… कभी अकड़, कभी पाबंदी, कभी मनमुटाव न आए होते…..!!!!

वह लौट आई, आँसू पोंछते हुए…!!

अगले दिन संगीत था।
कीर्ति ने वह मैरून साड़ी पहनी, जो राजवीर पसंद करता था…!!

सिंगार किया तो वह उतनी ही खूबसूरत लग रही थी, जैसे शादी वाले दिन…!!

राजवीर उसे एकटक देखता रह गया…!!
दिल में एक कसक तैर गई…

जब उसने पुराना गाना लगाकर डांस किया
“तुमसे बिछड़ के हम… बिछड़ के क्या होंगे…::::
राजवीर सह न सका।
वह उठकर कमरे में चला गया…!!

कीर्ति की आँखें उसे खोजने लगीं…!!
डांस रोककर वह उसके पीछे गई…!!

दरवाज़ा खोला…….
राजवीर, बिस्तर पर बैठा रो रहा था…!!

कीर्ति हिल गई।
उसे दस साल में कभी रोते नहीं देखा था….!!

वह पास आई।
राजवीर ने जल्दी से आँसू पोंछे…….!!

“कुछ नहीं… आँख में धूल चली गई…!!
कीर्ति ने धीमे से पूछा
“पानी ला दूँ?”
“नहीं…”””””……

वह जाने लगी तो पीछे से एक टूटी आवाज़ आई
“कीर्ति… एक बार माफ कर दे…:::::….

उसके कदम रुक गए…!!

“किस बात के लिए?::::??
“मेरी जिद… मेरी बंदिशें… मेरा वह डर कि कोई तुझसे बातें न करे, तू किसी और के करीब न जाए… मैं स्वार्थी बन गया था…!!

कीर्ति ने आँखें बंद कर लीं।
“अब क्या फायदा राज… बहुत देर हो गई है…!!

राजवीर उसके सामने आकर खड़ा हो गया
“मैंने दस साल तुम्हें हर रोज़ याद किया है… पर मेरा अहंकार मुझे आने नहीं देता था…!!

कीर्ति की पलकों की नमी टपक पड़ी…::::”””::::…

“मैं भी रोज़ तुम्हारे कदमों की आहट सुनती थी….!!

और फिर जैसे ही वह मुड़ने लगी…!!
राजवीर ने उसका हाथ पकड़ लिया…!!
कीर्ति का दिल तेज़ धड़कने लगा…!!

“राज… छोड़ो…….!!

“नहीं।
इस बार अगर छोड़ा… तो शायद जिंदगी भर पकड़ न पाऊँगा…!!

और अगले ही पल
कीर्ति उसके सीने में समा गई।
दोनों रो रहे थे…
दस साल की दूरी पिघलकर एक पल में बह गई…!!

राजवीर की आवाज़ भर्रा गई
“अब कभी जाने मत देना खुद को… मैं टूट जाऊँगा…!!

कीर्ति ने काँपती आवाज़ में कहा
“अब तुम ही कहना… मैं कहाँ जाऊँगी?:::::??

उसने उसे और कसकर पकड़ा
“अब हमारी जिंदगी में अकड़ नहीं… सिर्फ हम होंगे…!!

दस साल बाद
दो दिल फिर से जुड़ गए…!!

और इस बार
दोनों ने फैसला किया
रिश्ते दिल ❤️से निभाएंगे, ???? अहंकार से नहीं।

नेहा जी की वाल से साभार

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Author: sssrknews

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