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“पहलगाम हमले के बाद अचानक खामोशी क्यों? एक बड़ा सवाल”

👉🏻पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जब पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया, तब एक अजीब बात देखने को मिली।

अचानक से देशभर में मुसलमानों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलनों की आवाज़ बंद हो गई। जो लोग सरकार के हर फैसले पर विरोध करते थे, वो अचानक खामोश हो गए।

आखिर क्यों….??

ना कोई प्रदर्शन, ना कोई नारेबाजी, ना ही कोई मौलाना या मौलवी पाकिस्तान या आतंकी हमले के पक्ष में कुछ बोलता दिखा।

उल्टा, ओवैसी, मदनी जैसे नेता जो सरकार की आलोचना में सबसे आगे रहते थे, वो भी सरकार की सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते दिखे।

ये चुप्पी सामान्य नहीं है। ये एक संकेत हो सकता है—आने वाले खतरे की चेतावनी।

आप खुद सोचिए, पहलगाम हमले के बाद जब पूरा देश गुस्से में था, उस समय विपक्ष के हिंदू नेता सरकार से सवाल कर रहे थे, लेकिन मुसलमान नेता एकदम चुप क्यों हो गए?

क्या ये सिर्फ डर था या कोई बड़ी योजना?

सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार द्वारा पाकिस्तान के वीजा रद्द करने के फैसले से मुसलमानों में घबराहट है। लेकिन ये घबराहट खुलकर नहीं दिख रही।

इसकी वजह है—बीते 25-30 सालों में भारत की लाखों मुस्लिम महिलाओं की शादी पाकिस्तान में हुई है।

अनुमान है कि इन शादियों से भारत में 75 लाख से 1 करोड़ तक पाकिस्तानी जिहादी पैदा हो चुके हैं—

शौहर पाकिस्तान में…

बीबी बच्चे हिन्दुस्तान में। निकाह के बाद भी लड़कियों की नागरिकता भारतीय है।

अगर भारत-पाक युद्ध जैसी स्थिति बनती है तो यही लोग देश के अंदर गृह युद्ध की स्थिति पैदा कर सकते हैं।

क्योंकि पूरे भारत में हजारों मुस्लिम परिवारों की बेटियां पाकिस्तान में ब्याही गई हैं। अब सवाल उठता है—उन बेटियों के करोड़ों रिश्तेदार क्या भारत के प्रति वफादार रहेंगे?

क्या वे अपने दामाद को मरने देंगे? क्या वो अपनी बहनों को विधवा होने देंगे?

बिल्कुल नहीं…..

खैर…..इन्हीं संबंधों की आड़ में कई लोग सरकारी नौकरियों में बैठे हैं। हो सकता है वे खुफिया जानकारी पाकिस्तान भेजते हों, अपने ही घर की बेटियों-दोहितियों के लिए।

ये सिर्फ आशंका नहीं है—

बल्कि यही कारण है कि पाकिस्तान को भारत में आतंकी गतिविधियां फैलाने में ज्यादा मुश्किल नहीं आती।

ये एक सोचा-समझा जिहादी नेटवर्क है।

जो 1947 के बाद से ही बनना शुरू हो गया था।

अब मोदी सरकार के वीजा रद्द करने के बाद ये पूरी सच्चाई सामने आ रही है कि लाखों पाकिस्तानी महिलाओं ने भारत की नागरिकता अभी तक अपने पास रखी है।

ये महिलाएं सरकारी योजनाओं का लाभ लेती रहीं, अस्पतालों में इलाज करवाती रहीं और अपने पाकिस्तानी रिश्तेदारों को भारत बुलाकर इलाज के नाम पर रैकी करवाती रहीं।

ये सारी रिश्तेदारियां, निकाहबाजियाँ, अब देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी हैं।

भारत अगर पाकिस्तान से युद्ध की ओर बढ़ा, तो ये लोग घर के भीतर से ही हमला करेंगे। क्योंकि उनके रिश्ते, उनके जज़्बात, उनके वफादारी भारत के साथ नहीं—

पाकिस्तान के साथ हैं…

इसीलिए ज़रूरी है कि एक ठोस कानून बने।

जिन महिलाओं की शादी पाकिस्तान में हुई है, उनकी सभी सरकारी योजनाओं की पात्रता खत्म की जाए।

उनका राशन कार्ड, पासपोर्ट रद्द किया जाए।

उनके फोन, सोशल मीडिया, हर गतिविधि सर्विलांस पर हो।

अगर नियम तोड़ते पाए जाएं, तो बिना देर किए जेल भेजा जाए। और अगर उनके पति-पारिवार पाकिस्तान में हैं, तो उन्हें भी वही भेज दिया जाए।

देश की आंतरिक सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा नहीं होता।

और इस समय सबसे बड़ा खतरा यही है—

घर के भीतर छुपा दुश्मन…

जो लोग सोचते हैं कि ये सब अफवाह है, उन्हें समझना होगा—ये “निकाहबाजी जिहाद” एक सच्चाई है और अगर अभी नहीं चेते, तो कल बहुत देर हो चुकी होगी।

जय हिंद।

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Author: sssrknews

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