नई दिल्ली: Delhi High Court ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी एक मौलवी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोपी पर ‘जिन्न से छुटकारा दिलाने’ के बहाने नाबालिग का कई बार यौन शोषण करने का आरोप है। अदालत ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए कहा कि आरोपी ने परिवार की आस्था और लड़की की कमजोर मानसिक स्थिति का फायदा उठाया।
जस्टिस Swarana Kanta Sharma की एकल पीठ ने नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध सबूत आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोपों की पुष्टि करते हैं।
‘रूहानी इलाज’ के नाम पर घर आने लगा था मौलवी
मामले के अनुसार, पीड़ित नाबालिग लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी। परिवार को शक था कि लड़की पर किसी ‘जिन्न’ या बुरी आत्मा का साया है। रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों की सलाह पर परिवार आरोपी मौलवी के संपर्क में आया, जो खुद को रूहानी इलाज करने वाला बताता था।
इसके बाद मौलवी नियमित रूप से लड़की के घर आने लगा। आरोप है कि एक दिन उसने परिवारवालों को कमरे से बाहर भेज दिया और कहा कि जिन्न निकालने की प्रक्रिया गोपनीय होती है।
अश्लील हरकतों को बताया ‘इलाज’
पीड़िता के मुताबिक, आरोपी ने उससे कहा कि उसके शरीर में मौजूद जिन्न को केवल अश्लील हरकतों के जरिए ही बाहर निकाला जा सकता है। इसके बाद उसने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। आरोपी ने लड़की को धमकी भी दी कि यदि उसने किसी को इस बारे में बताया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
बाद में पीड़िता ने अपनी मां को पूरी घटना बताई, जिसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। Prem Nagar Police Station में FIR दर्ज की गई। आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 376 और POCSO Act के तहत मामला दर्ज है।
बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
आरोपी अक्टूबर 2019 से जेल में बंद है। बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में दलील दी कि ट्रायल काफी आगे बढ़ चुका है और पीड़िता सहित मुख्य गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने गवाहों के बयानों में कथित विरोधाभास का हवाला देते हुए जमानत की मांग की।
हालांकि राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने अंधविश्वास और धार्मिक आस्था का दुरुपयोग कर नाबालिग का शोषण किया। पीड़िता के बयान FIR और धारा 164 CrPC के तहत दिए गए बयान में समान हैं।
अदालत ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर गवाहों के बयानों में विरोधाभास जैसे मुद्दों की विस्तृत जांच नहीं की जा सकती। अदालत ने माना कि आरोपी ने खुद को ‘रूहानी इलाज करने वाला’ बताकर परिवार का विश्वास जीता और उसी का दुरुपयोग किया।
कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामला ट्रायल के अंतिम चरण में है। हालांकि, आरोपी की लंबी न्यायिक हिरासत को देखते हुए ट्रायल कोर्ट से मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया गया है।






