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“महिला सशक्तिकरण या भटकाव? एक कड़वा सच”

यह वही महिला ह
महिला आयोग अध्यक्ष

अब मेरी पोस्ट ध्यान से पढ़ना अगर समय हो तो

क्या यह पढ़ी लिखी नहीं थी?
क्या यह आजाद महिला नहीं थी?
जैसे कहा जाता है पहले महिलाओं को आजादी नहीं थी

अब तो आजाद भी थी
और पढ़ने से समझदार होता ह
तो क्या यह आजाद नहीं थी?

जी हां यह पढ़ी लिखी भी थी
यह आजाद भी थी
यह चारदीवारी में बंद रहने वाली भी नहीं थी

क्या यह कमजोर थी?

फिर घिनौने कार्य में लिप्त कैसे हो गई??

अपना शोषण राजी खुशी कैसे करवा लिया??
अब कोई कहेगा डर , भय , ब्लैकमेल

जी नहीं कारण कुछ और है वह मैं बताता हूं

सबसे पहले यह बात समझिए कि ईश्वर ने महिला पुरुष को अलग अलग बनाया ह
और दोनों का अलग अलग महत्व ह जो पुरुष कर सकता ह महिला उससे कही ज्यादा कर सकती ह

इसलिए महिला को सनातन में देवी रूप पूज्यनीय माना गया ह
और हम कन्या से लेकर अलग अलग रूप में महिला को पूज्यनीय मानते रहे ह

महिला में एक भाव होता ह वह ह उसकी कोमलता
शायद इसी का फायदा पुरुष समाज ने उठाया ह
और महिलाओं को आजादी के नाम पर बरगलाया गया ह

जहां सनातन में कहा गया कि एक महिला को बाल्यावस्था में पिता के , यौवन अवस्था में भाई के , और वृद्धावस्था में बेटे के निगरानी में रहना चाहिए

इसका मतलब ह कि बचपन में कोई भी समस्या हो तो इसका निराकरण पिता से बढ़कर कोई नहीं कर सकता

जवानी में भाई के जैसा कोई रक्षक नहीं हो सकता
इसका मतलब आप जवान ह तो आपके भाई को आपकी हर बात , हर हरकत का भाई को पता होना चाहिए जिससे आप गलत राह पर नहीं चल सकती
और बुढ़ापे में बेटे का मतलब ह सेवा से
बुढ़ापे में एक महिला को अपने बेटे के साथ देखरेख में रहना चाहिए जिससे वह देखभाल कर सके

अब इसे गुलामी कहकर पुकारा गया और महिला को आजाद कर दिया गया

अब आजाद हुई महिला जिसमें ममत्व का गुण ह
जिसमें भावनाओं में बहने का गुण ह
हर किसी पर विश्वास करने का गुण ह
उसी का पुरुष ने नाजायज फायदा उठाया ह
और इसी लिए भाई की देखरेख को गुलामी कहा ह

क्योंकि भाई के साथ देखरेख में
पति कि निगरानी में
अगर महिला रहेगी तो किसी की मजाक ह क्या कोई आंख उठाकर देख सके

अब इस महिला का ही देख लीजिए
मान लीजिए यह इस पाखंडी से जितनी बार मिलने आती उतनी बार इसका पति साथ रहता
तो क्या इसका शोषण हो पता???
कभी नहीं

बस आजादी का नाम ही शोषण करना ह

अगर महिला को इज्जत की जिंदगी अपने भाई पति या बेटे के निगरानी के साथ रहने से मिलती है
मुझे लगता ह यह गुलामी अच्छी ह

वरना आजादी वाली नंगी होकर नाच रही ह
देश में आजादी वाली महिलाओं के 94 रेप रोज हो रहे ह

और पता नहीं अनगिनत महिला इस महिला की तरह आजादी के नाम पर शोषण का शिकार हो रही ह

और बड़ी वाली आजादी लेने वाली 5 करोड़ महिला इस देश में वेश्याघरों में सेवा दे रही ह

महिला को वापिस तथाकथित गुलामी की तरफ जाने की जरूरत ह
जहां बचपन में कन्या पूजन के रूप में पूजी जाए
शादी के बाद धर्मपत्नी की तरह पूजी जाए

और बुढ़ापे में देवी की तरह पूजी जाए

ना कि जवानी में चार अफेयर की आजादी, फिर लिव इन में रहकर रखैल की आजादी
और बुढ़ापे में वृद्धाश्रम की आजादी में जिए

अब तय महिला को करना ह उसे तथाकथित गुलामी में रहना ह या आधुनिक आजादी में

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Author: sssrknews

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