राजस्थान के उदयपुर के मोहम्मद शेर खान, जिन्होंने केवल 8वीं तक पढ़ाई की है, अपने अनोखे आविष्कार ‘विश्वगुरु चूल्हा’ के कारण चर्चा में हैं। पेशे से लोहार शेर खान ने 27 साल के अनुभव के आधार पर यह चूल्हा बनाया, जो गांवों में खाना बनाने की समस्याओं, जैसे ज्यादा समय, अधिक लकड़ी की खपत और धुएं से होने वाली स्वास्थ्य दिक्कतों का समाधान करता है।
यह चूल्हा 3-इन-1 सिस्टम पर काम करता है, जिसमें एक साथ दाल/सब्जी पकाना, तलना और रोटी/बाटी सेंकना संभव है। खास बात यह है कि सिर्फ 2 किलो लकड़ी में 30 मिनट के भीतर 25–30 लोगों का खाना तैयार हो जाता है। इसका डिजाइन ऐसा है कि गर्मी का बेहतर उपयोग होता है और धुआं कम निकलता है, जिससे पर्यावरण को भी फायदा मिलता है। शेर खान अब तक 10,000 से अधिक चूल्हे बेच चुके हैं। यह आविष्कार समय, ईंधन और मेहनत, तीनों की बचत करता है।






