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“न्यायपालिका पर सवाल: किताब हटाने से क्या भ्रष्टाचार खत्म हो गया?”

प्रश्न-चिन्ह :

चीफ जस्टिस ने NCERT की किताबbपर केंद्र से कहा था –
नाम बताओ, हम एक्शन लेंगे –
क्या आपको नाम पता नहीं हैं ?

एक किताब को हटवा कर न्यायपालिका क्या बेदाग़ हो गई

– क्या न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के दाग साफ़ हो गए – पिछली सुनवाई में किताब हटाने के आदेश देते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था, “आप नाम बताओ, हम एक्शन लेंगे”

– यह बात सुनकर मुझे ताज्जुब भी हुआ और हंसी भी आई,

क्या जनाब सूर्यकांत जी को नाम नहीं पता जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं – लेकिन आपके एक्शन भी इतने गोपनीय होते हैं जो किसी को कानों कान खबर नहीं लगती –

अभी कुछ दिन पहले कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा था 2016 से 2026 के बीच हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार की 8630 शिकायतें आई – क्या चीफ जस्टिस को उनके नाम नहीं पता चले – क्या एक्शन हुआ –

यशवंत वर्मा का नाम तो एक साल पहले सामने आया था जब उनके घर से 15 करोड़ के अधजले नोट मिले थे – क्या वह भ्रष्टाचार नहीं था –

सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का जनक न्यायपालिका में कॉलेजियम हैं, जिसका जिक्र संविधान में नहीं है लेकिन देश पर थोपा हुआ है – ऐसी गोपनीयता रहती है कि किसी को पता नहीं चलता कैसे जज बनाये जाते हैं –

सरकार अपने विवेक से कॉलेजियम की अनुशंसा पर जजों की नियुक्ति करती है और जहां गलत लगता उन मामलो पर ही रोक लगाई जाती है –

फिर 5 रिटायर्ड हाई कोर्ट के जजों को हाई कोर्ट के जज Contractual basis पर नियुक्त करने की क्या जरूरत पड़ गई -इसमें भ्रष्टाचार की दुर्गन्ध आती है –

अभिषेक मनु सिंघवी का नाम तो सुना ही होगा –

2009 में सिंघवी की संपत्ति 43 करोड़ थी और आज वह 2869 करोड़ कैसे हो गई – ये सीधा सीधा भ्रष्टाचार का मामला है –

2012 में सिंघवी का वीडियो सामने आया था जिसमें वह एक महिला वकील को जज बना रहा था लेकिन उस केस को दबा दिया गया –

उसने अपने ड्राइवर पर आरोप लगाया कि उसने फर्जी वीडियो बनाया लेकिन वैसे तो हर वीडियो की फॉरेंसिक जांच होती है लेकिन उसके वीडियो की कोई जांच नहीं हुई और दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस रेवा खेत्रपाल ने वीडियो पर पाबंदी लगा दी –

खेत्रपाल रिटायर होने के बाद नवंबर, 2015 में दिल्ली की लोकायुक्त बन गई जब केजरीवाल सत्ता में आ गया और सिंघवी केजरीवाल का वकील रहा है – इसमें भ्रष्टाचार की दुर्गन्ध आती है –

लालू यादव 12 साल से 5 मामलों में 32 साल की सजा पा कर भी जमानत पर मौज में घूम रहा है और झारखंड हाई कोर्ट उसकी किसी अपील पर सुनवाई नहीं कर रहा – ये है भ्रष्टाचार –

दिल्ली हाई कोर्ट 2G मामलों में CBI और ED की अपील लिए बैठा है – ये है भ्रष्टाचार –

CBI जज ओ पी सैनी 18 महीने तक चिदंबरम की गिरफ़्तारी पर रोक लगाए रहे – यह था भ्रष्टाचार –

सैनी ने ही फिल्म की स्टोरी बता कर 2G में सभी को बरी कर दिया था –

सलमान खान का Hit N Run केस में महाराष्ट्र सरकार की अपील स्वयं सुप्रीम कोर्ट 10 साल से लिए बैठा है – क्या कहेंगे इसे –

दो-दो अदालतों ने राहुल गांधी को दोषी करार दिया और 2 वर्ष की सजा सुनाई लेकिन जस्टिस गवई ने खुद को कांग्रेसी परिवार का जज स्वीकार करते हुए राहुल गांधी को छोड़ दिया –

और सुनिए, एक दिन में दो बेंच गठित करके तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत दे दी –

हर भ्रष्टाचार के सबूत नहीं होते लेकिन शंका तो पैदा होती ही हैं –

चीफ जस्टिस साहेब, आपको NCERT की एक किताब ने हिला दिया लेकिन कभी सुप्रीम कोर्ट का कलेजा नहीं फटा जब वही NCERT भारत की आत्मा को लहूलुहान करता रहा वामपंथियों की किताबो में हिंदू संस्कृति की हत्या करते हुए –

आत्मनिरीक्षण की जरूरत है, न्यायपालिका को……

अपने चैम्बर के झरोखों से बाहर झांकिए और देखिए कि क्या जनता सच में न्यायपालिका को भ्रष्ट नहीं समझती –

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Author: sssrknews

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