ये बगावत नहीं लव जिहाद है …. और मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दिन
मोनालिसा आज फिर चर्चा में है और मैं मानसिक अवसाद में क्योंकि एक गरीब जंगलों में रहने वाली लड़की जो महाकुंभ में वायरल होने के बाद भाग कर अपने डेरा महेश्वर चली गई थी मुझे उसकी गंगा जैसी पवित्रता अच्छी लगी और उसका प्रकृति जैसा रूप मैने उसको प्रशिक्षण देकर फिल्म में अभिनेत्री बनाने की घोषणा की देश दुनिया ने स्वागत किया लेकिन ये बात हमारे विरोधियों में वसीम रिजवी और उसका मूत्रपान कर मीडिया में आने के जिज्ञासुओं को पसंद नहीं आई और मुझे झूठे आरोप में जेल भेज दिया , उद्देश्य यही था कि माननीय योगी आदित्यनाथ जी के महाआयोजन महाकुंभ को असफल करना, .. मैने जेल रहकर फिल्म की कहानी को लिखा और जो मूतपुत्र कह रहे थे कि सनोज कभी फिल्म नहीं बनाएगा फिल्म पूरी कर उनके मुंह पर मैने इतनी विष्ठा वृत्ति की कि अब उनको कोई आरोप नहीं समझ आया कि उनको अब क्या करना चाहिए सब एक दूसरे का बंद दरवाज़ा झांकते रहे ..
उनके पास एक ही विकल्प था मोनालिसा जिसको मैं मां गंगा का अवतार मानता था मोनालिसा की जिंदगी इतनी आसान नहीं है जैसा आप सब देखते है उसकी मां बड़ी मां छोटी मां पापा बड़े पापा छोटे पापा सब दिखावे के और उसके लिए एक मजबूरी थे उसकी जिंदगी उसकी असली मां पर टिकी थी जिसको उसको बाप ने भगाकर दूसरी शादी कर ली थी, क्योंकि बंजारों के कानून और अनुशासन अलग होते है तो मोनालिसा को उसकी नई मां जो बताई गई उसको स्वीकार करना पड़ा, लेकिन वो जब बड़ी सेलिब्रिटी बन गई और जब कहीं उसको उसकी असली मां भिखारियों की तरह माला बेचती दिखाई देती तो वो रोती थी कई बार उसने मुझसे ये दर्द बयान किया और बगावत की इच्छा भी जताई कि अगर कभी मौका मिलेगा तो सबको लात मारकर अपनी मां के पास जाऊंगी , मैने हमेशा उसको समझाया लेकिन बहुत व्यक्तिगत मामलों में हस्तक्षेप उचित नहीं था क्योंकि इस्लामिक ताकतों ने मुझे बलात्कारी बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी ….
मोनालिसा का आज का उठाया हुआ कदम उसको बगावत लग रहा होगा लेकिन असल में ये लव जिहाद है जिसका शिकार वो हो चुकी है जिसमें वो तोतला शिक्षक भी शामिल है जो मेरे द्वारा वेतन दिए जाने के बाद मोनालिसा का मैनेजर और दलाल बन चुका था, आज वो बेरोजगारों हो गया, उसको मैने मोनालिसा को शिक्षित करने के लिए चुना था , लेकिन बाद में वो दलाल बनकर उसका सौदा दक्षिण भारत में करने लगा था ,और बंजारा समुदाय से मेरी दूरी बना दी जिसका परिणाम आज सामने है , उसने बंजारों और मोनालिसा को इतना समझाया था कि अगर कहीं कोई बात आए कि यहां तक लाने में आपको किसने मदद की तो सनोज मिश्रा का नाम मत लेना और बोलना कि सब गंगा मैया ने किया, चंद रुपयों के लालच में गंगा की पुत्री आज लव जिहाद का शिकार हो गई अगर जांच की जाएगी तो इसके पीछे मेरे विरोधी ही होंगे जिन्होंने मुझे जेल भिजवाया था , आज सबसे बड़ा संकट इस्लामिक जेहादियों ने ये खड़ा कर दिया है कि जिस मोनालिसा को गंगापुत्री मानकर मैने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया १० करोड़ का कर्ज लेकर फिल्म को पूरा किया और आज तक उसका पूरा खर्च मैने उठाया उसकी वजह से जेल गया , वो सब उसने एक मुसलमान के साथ भाग कर नष्ट कर दिया ,जिसके लिए सब किया उसने आज मुझे कहीं जवाब देने लायक नहीं रखा, उसका बाप पुलिस स्टेशन के पास रो रहा है अकेला मै क्या करूं खुद नहीं समझ आ रहा, मां गंगा और महाकुंभ की पवित्रता पर क्या ये दाग है या मेरा किसी को गंदगी से उठाकर बड़ा बनाने का लिया गया गलत निर्णय कुछ समझ नहीं आ रहा इसमें सबसे बड़े नुकसान में कौन रहा ……?
संजय मिश्रा जी, मुम्बई के वाल से साभार



